राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण- पुलिस भ्रष्टाचार, कदाचार तथा अकार्यक्षमता के खिलाफ न्यायसंस्था

सर्वोच्च न्यायलय के आदेशनुसार राज्य तथा केंद्र सरकार को राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन करना अनिवार्य है वरना उन्हें अवमानना के लिए दंडित किया जा सकता है.

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पुलिस प्रशासन नागरिकों के संविधानद्वारा दिये मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए ताकतवर प्रशासन होने की वजह से वह किसी भी देश की प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक निकाय है. हालाँकि, पुलिस बल को मिले अमर्यादित अधिकार और उस पर निगरानी करने हेतु तटस्थ और प्रभावी न्याय तंत्र के अभाव में भारत में पुलिस प्रशासन नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में दुर्भाग्यवश पूरी तरह से विफल हो गया है. आम जनता का पुलिस प्रशासन पर से विश्वास पूरी तरह उड़ चुका है जो देश के लिए भयावह है.

 

कम तनख्वाह तथा सरकारी अनास्था पुलिस के भ्रष्टाचार, कदाचार तथा अकार्यक्षमता का समर्थन नहीं कर सकता-
यह लेख को लिखने से पहले, एक बात स्पष्ट है, कि पुलिस बल पर भारी राजनैतिक दबाव, वेतन की कमी और पुलिस के हित के लिए सरकार के तरफ से भारी अनास्था को कई बार देशवासियों के सामने विविध संस्थाओंद्वारा उजागर किया गया है. कई न्यूज चॅनलों में पुलिस को सरकारद्वारा उपलब्ध किये गए खस्ता हाल घरों या क्वार्टर की हालत देखकर सरकार पुलिस प्रशासन के साथ जानवरों जैसा ही बर्ताव करती है ऐसा भयानक वास्तव भी सामने आ चुका है.

हालांकि, उपरोक्त कारण किसी भी हाल में पुलिस बल की अकार्यक्षमता, कदाचार तथा भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इससे भी कई गुना विदारक और खराब परिस्थितियों में बिना कुछ अपेक्षा किये देश के लिए कई क्रांतिकारियों ने आपने प्राण न्योछावर किये है. जब बात राष्ट्र सेवा तथा जनता की मौलिक अधिकारों की रक्षा की आती है तो ऐसे वक्त में अपना स्वार्थ देखना या यह एक तरह से राष्ट्रद्रोह ही है. ऐसे में पुलिस प्रशासन के कुछ इमानदार पुलिस अधिकारी तथा आपातकालीन परिस्थितयों में देशवासियों के लिए शहीद होनेवाले पुलिस अधिकारीयों का आदर रखकर यह लेख सार्वजनिक किया जा रहा है.  संगठन के अंग्रेजी मूल लेख के हिंदी आवृत्ती सार्वजानिक कर रहें है, अंग्रेजी लेख की लिंक नीचे दे रहें है-
Police Complaints Authority- Legal Remedy Against Corrupt & Inefficient Police
इसी लेख का मराठी भाषा में भी अनुवाद किया गया है उसकी लिंक-
पोलिस तक्रार निवारण प्राधिकरण- भ्रष्ट व अकार्यक्षम पोलीस अधिकारींविरोधात न्यायसंस्था  

पुलिस प्रशासन सुधार का इतिहास संक्षेप में-
सन २००६ में पुलिस प्रशासन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक और ऐतिहासिक हस्तक्षेप से पहले, सरकार सन १९७७ से केवल विभिन्न समितियों का गठनही कर रही थी. एक के बाद एक कई समितियों ने अपनी रिपोर्ट सरकार के सामने रखीं लेकिन उस पर बजाय दूसरी समिति गठित करने के अलावा किसी भी सरकार ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं कीं. इन समितियों में से महत्वपूर्ण समितियाँ थीं-
राष्ट्रीय पुलिस आयोग (१९७७-१९८१),
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग,
विभिन्न कानून समितियां,
रिबेरो समिती,
पद्मनाभाई समिती,
मलीमथ समिति ई.
इतनी समितियाँ गठित करने के बाद भी मानो सरकार का समाधान न होने पर आखिरकार सरकार द्वारा सन २००५  में पुलिस प्रशासन में सुधार हेतु संशोधन करने के लिए फिर से नए सिरे से सोराबजी समिति नियुक्त की गई, ताकि समितियों और उनके सुझावों पर काम किया जा सके!

अंत में, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक हस्तक्षेप, देशभर में राज्य तथा जिलास्तरीय पुलिस शिकायत निवारण प्राधिकरण का गठन करने का आदेश-
एक तरफ, जहा पुलिस सुधार के प्रति सरकार की गंभीर अनास्था थी और वह जानबुझकर देरी की रणनीति अपना रही थी वहीँ दूसरी तरफ कुछ सामाजिक संस्थाओं और सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सन १९९६ में सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की, जिसमें पुलिस सुधार को लेकर सर्वोच्च न्यायलयद्वारा हस्तक्षेप की मांग की गई. यह याचिका भी दुर्भाग्यवश १० साल से प्रलंबित रह गई.

मात्र अंत में इस मामले में समग्र स्थिति का संज्ञान लेने के बाद और सन २००६ में विभिन्न समितियोंद्वारा ‘धोके की घंटी’ की हालत सार्वजानिक करने पर आखिरकार सर्वोच्च न्यायलयने सन २००६ में Prakash Singh & Ors vs Union Of India, on 22 September, 2006 (Writ Petition No.310/2016) इस रिट याचिका में संविधान के अनुच्छेद ३२ में अपने प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए ७ सूत्रीय निर्देश देश के सभी केंद्र तथा राज्य सरकारों को जारी किये, जिसके द्वारा ३१ दिसंबर २००६ के पहले राज्य स्तर पे तथा जिला स्तरों पे पुलिस शिकायत प्राधिकरण गठित करने के आदेश दिए गए. इतना ही नहीं सर्वोच्च न्यायालयने अपने निर्देशों को संविधान के अनुच्छेद १४२ अंतर्गत घोषित किया जिसका मतलब यह देश के हर केंद्रीय तथा राज्य सरकारों पर बाध्यकारी होंगे और यह आदेश न मानने पर संबंधित राज्य अथवा केंद्र सरकार को अदालत की अवमानना ​​के लिए दंडित किया जा सकता है.
उपरोक्त संदर्भीय सर्वोच्च न्यायलय का २२ सितंबर २००६ का आदेश आप निचे दी हुई लिंक से देख सकते है तथा डाउनलोड कर सकते है-
Prakash-Singh-Ors-vs-Union-Of-India-And-Ors-on-22-September-2006

सर्वोच्च न्यायलय के उपरोक्त संदर्भीय निर्णय की मुख्य विशेषतायें-
उपरोक्त संदर्भीय सर्वोच्च न्यायलय के ७ सूत्रीय निर्णय की विशेषताओं में से महत्वपूर्ण विशेषतायें निम्नलिखित है-
देशभर में ‘पुलिस शिकायत प्राधिकरण’ की स्थापना
पुलिस अधिकारियों के भ्रष्टाचार, कदाचार तथा अकार्यक्षमता के खिलाफ शिकायतों की जांच करने के लिए पुलिस अधीक्षक रैंक के निचे के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की संज्ञान लेने के लिए जिला स्तर पर एक पुलिस शिकायत प्राधिकरण गठित होगा तथा पुलिस अधीक्षक रैंक के ऊपर के पुलिस कर्मचारियों के भ्रष्टाचार, कदाचार तथा अकार्यक्षमता के खिलाफ शिकायतों का संज्ञान लेने के लिए राज्य स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण गठित किया जायेगा. जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण के अध्यक्ष जिला स्तर से निवृत्त न्यायाधीश तथा राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण के अध्यक्ष  न्यायालय के निवृत्त न्यायाधीश होंगे.

‘जांच विभाग’ और ‘कानून एवं सूव्यवस्था’ संभालनेवाली शाखायें अलग होंगी-
पुलिस प्रशासन का जांच विभाग तथा कानून एवं व्यवस्था संभालनेवाली शाखायें पूरी तरह से अलग कर दी जायेंगी ताकि दोनों व्यवस्थायें स्वतंत्र रूप से काम कर सकें और उनपर अतिरिक्त दबाव ना हो.
पुलिस तबादले में राजनितिक हस्तक्षेप ख़त्म करने के लिए स्थापना बोर्ड का गठन-
पुलिस तबादलों में राजनितिक हस्तक्षेप कम करने तथा प्रशसान में सुसुत्रता ने के उद्देश से हर राज्य में स्थापना बोर्ड का गठन किया जायेगा जो पुलिस प्रशासन में तबादले आदि विषयों पर नियंत्रण रखेगा.

गंभीर अपराधों का संज्ञान लेना-
इसके अंतर्गत पुलिस क्रूरता, अत्याचार जैसे:-
अवैध रूप से पुलिस हिरासत में रखना,
पुलिस हिरासत में गंभीर चोट पहुंचाना या मृत्यु,
पुलिस हिरासत में बलात्कार की कोशिश या बलात्कार करना,
या अन्य कोई अपराध जिसमें अवैध शोषण, घर अथवा जमीन हड़पना,
या अन्य कोई घटना, जिसमें पद अथवा शक्तियों का दुरूपयोग किया गया हो आदि किसी भी प्रकार का कोई भी अत्याचार या क्रूरता पुलिस के द्वारा की गई हो,
ऐसे गंभीर संज्ञान हेतु ‘पुलिस शिकायत प्राधिकरण’ की स्थापना राज्य तथा जिलों के स्तर पर की जाएगी.

उदाहरणसहित स्पष्टीकरण-
उपरोक्त संदर्भीय सर्वोच्च न्यायलय का आदेश किस तरह से अमल में लाया जाना चाहिए और वो किस तरह आप ले राज्य में प्रतिबिंबित होगा ये आम जनता को समझने में आसानी हो इसलिए उदहारण के तौर पर हम हरियाणा राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन और उसके बारे में अन्य जानकारी दे रहें है. अन्य राज्य के वाचक अपने राज्यों के राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण की जानकारी सरकारी वेबसाईट तथा सरकार को सुचना के अधिकार कानून अंतर्गत आवेदन कर के जानकारी प्राप्त कर सकते है. याद रहें, अगर आप के राज्य सरकार ने राज्य तथा आप के जिले में पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन नहीं किया है तो वह न्यायलय के अवमानना के अपराध के दंडित किये जा सकते है, और यदि आप के सरकारने अभी तक पुलिस शिकायत प्राधिकरणका गठन नहीं किया है तो इसके खिलाफ आप न्यायालयीन अवमानना की याचिका दाखल करें या अपने राज्य के उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश को जरुर शिकायत करें.

हरियाणा राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण-
हरियाणा सरकारने राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण के लिए ख़ास तौर पर वेबसाईट निर्मित की है जिसकी  निम्नलिखित लिंक है-
http://spcahry.nic.in/hindi/index.html
पता-
राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण
हरियाणा
पुराना लोक निर्माण (बी एंड आर) भवन,
सैक्टर 19-बी, चण्डीगढ़ – 160019
दूरभाष/फैक्स नम्बर: 0172 2772244
कार्यालय समय :- पूर्वाहन् 9 बजे से 5 बजे अपराहन् तक (हरियाणा राज्य के कैलंडर अनुसार)
शिकायत हेतु:
ई-मेल : spca.haryana@nic.in
सुझाव हेतु: –
ई-मेल: spcaopinion@gmail.com

गठन-
हरियाणा राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण, का गठन राज्य सरकार द्वारा हरियाणा पुलिस अधिनियम २००७ के अन्तर्गत दिनाँक १६.०८.२०१० को किया गया. श्री राम निवास, भारतीय प्रशासनिक सेवा (सेवानिवृत) को राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण नियुक्त किया गया है. हरियाणा पुलिस अधिनियम २००७ की धारा ६५ के अन्तर्गत यह प्राधिकरण पुलिस कार्मिक के विरूद्ध गम्भीर कदाचार के आरोपों की या तो स्वप्रेरणा से या निम्नलिखित में से किसी से शिकायत प्राप्त होने पर जाँच करेगाः-
(क) पीड़ित या शपथ-पत्र पर उसकी ओर से किसी व्यक्ति द्वारा,
(ख) राष्ट्रीय या राज्य मानव अधिकार आयोग.

प्राधिकरण की शक्तियाँ-
प्राधिकरण द्वारा जांचे गये मामलों में उसे सिविल प्रकिया संहिता १९०८  (१९०८ का अधिनियम ५), के अधीन वाद का विचारण करने के लिए तथा विशिष्टया निम्नलिखित मामलों के संबंध में सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगीः-
(क) साक्षियों को समन करना तथा हाजिर कराना तथा उनकी परीक्षा शपथ पर करना;
(ख) किसी दस्तावेज को प्रकट करना तथा प्रस्तुत करना;
(ग) शपथ पत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अपेक्षा करना;
(ड) साक्षियों या दस्तावेजों के परीक्षण के लिए प्राधिकार देना; तथा
(च) यथाविहित कोई अन्य मामला.
राज्य सरकार कारवाई करने पर बाध्य-
प्राधिकरण जांच पूरी होने पर राज्य सरकार को अपना निर्णय प्रेषित करेगा. राज्य सरकार प्राधिकरण के निर्णयों तथा सिफारिशों पर विचार करेगी तथा उचित कार्रवाई करेगी.

अधिकार क्षेत्र-
६५. (१) प्राधिकरण पुलिस कार्मिक के विरूद्ध नीचे तथा विस्तृत ‘‘गम्भीर कदाचार’’ के आरोपों की या तो स्वप्रेरणा से या निम्नलिखित में से किसी से शिकायत प्राप्त होने पर जाँच करेगाः-
(क) पीड़ित या गृहीत शपथ-पत्र पर उसकी ओर से किसी व्यक्ति,
(ख) राष्ट्रीय या राज्य मानव अधिकार आयोग.
व्याख्याः- इस अध्याय के प्रयोजन के लिए ‘‘गम्भीर कदाचार’’ से अभिप्राय होगा पुलिस अधिकारी का कोई कृत अथवा अकृत जो निम्नलिखित की ओर ले जाता है या समझी जाती हैः-
(क) पुलिस हिरासत में मृत्यु;
(ख) बलात्कार या बलात्कार करने का प्रयास
(ग) पुलिस हिरासत में गहरी चोट
परन्तु प्राधिकरण केवल ऐसी गिरफ्तारी या निरोध की शिकायत की जाँच करेगा, यदि उसकी शिकायत की सत्यता के बारे में प्रथम दृष्ट्या संतुष्टि हो जाती हैः
परन्तु यह और कि कोई भी गुमनाम, समानार्थक तथा कृतकनाम शिकायतें ग्रहण नहीं की जाएंगी.
अवैध हिरासत में रखना,
पदीय दुरूपयोग ई.

(2) प्राधिकरण पुलिस महानिदेशक या राज्य सरकार द्वारा इसे निर्दिष्ट किसी अन्य मामले की भी जाँच कर सकता है।

हरियाणा राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण शिकायत कैंसे करे-
शिकायतकर्ता अपनी शिकायत कार्यालय की ई-मेल पर भेजना चाहता है तो उसको यह सुविधा उपलब्ध है कि वह अपनी शिकायत कार्यालय की ई-मेल spca.haryana@nic.in पर भेज सकता है. लेकिन यह शिकायत भेजने के एक सप्ताह के अन्दर उसे दिए हुए फार्म में शपथ पत्र तथा अपने पहचान व रिहायश के पहचान पत्र की सत्यापित प्रतिलिपि व्यकितगत रूप से या पत्राचार द्वारा प्राधिकरण कार्यालय को भेजनी होगी अन्यथा उस शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं कि जायेगी. यह प्रावधान गुमनाम तथा छद्‌म नाम शिकायत न हो उसे रोकने के लिए किया गया है।

शिकायतकर्ता अपनी शिकायत दिए गए प्रारूप (प्रारूप -I) के अनुसार भेज सकता है लेकिन शिकायत के साथ अपना हलफनामा (जो प्रारूप -II में दिया गया है) जरूर संलग्न होना चाहिए.
प्रारूप I और II डाउनलोड करने के लिए निम्नदर्शित लिंक देखें-
http://spcahry.nic.in/hindi/forms.html

अन्य आयोग तथा प्राधिकरण का विकल्प-
इस तरह से आम जनता पुलिस के भ्रष्टाचार, कदाचार तथा अकार्यक्षमता के खिलाफ क़ानूनी रूप से जिन्हें न्यायलय में जाना संभव नहीं है, तो बिना अधिवक्ता नियुक्त किये खुद व्यक्तिशः राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण अथवा अपने जिले के पुलिस शिकायत प्राधिकरण के पास शिकायत कर के न्याय प्राप्ती कर सकते है.  इसके अलावा जनता के पास मानवी हक्क आयोग, महिलाओं तथा बच्चों के अपराधों के प्रकरणों में महिला आयोग तथा बाल हक्क संरक्षण आयोग को भी संपर्क किया जा सकता है. ऐसे प्राधिकरण तथा आयोग में सुनवाई में देरी जरुर होती है लेकिन न्यायलय या जन आन्दोलन ना कर सकने की स्थिति में ऐसे आयोग तथा प्राधिकरण के पास जरुर संपर्क करना चाहिए, कुछ भी ना करने से अच्चा कुछ प्रयास करना हमेशा उचित होता है, जयहिंद!

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संस्थापक अध्यक्ष- भारतीय क्रांतिकारी संगठन

जरुर पढ़ें-
१) कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक तथा सरकारी योजना डाउनलोड तथा उपलब्ध करानेवाली सरकारी वेबसाईट
२) स्कूल की सीबीएसई संबद्धता या मान्यता ऑनलाईन जांचे
३) ट्राई की सुविधा से अनचाहे टेलीमार्केटिंग कॉलर का नंबर ९ दिन में हमेशा के लिए बंद करवायें

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कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक तथा सरकारी योजना डाउनलोड तथा उपलब्ध करानेवाली सरकारी वेबसाईट

नॅशनल पोर्टल ऑफ इंडिया तथा अन्य सरकारी वेबसाईटद्वारा केंद्र सरकार तथा सारी राज्य सरकारों के कानून, नियम तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल की जा सकती है.

कई बार आम जनता को केंद्र सरकार तथा कई राज्य सरकारों के अलग अलग कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक तथा कई सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी चाहिए होती है, मगर उन्हें यह जानकारी कहां से प्राप्त करें इसके बारे में सही तरीका नहीं मालूम होने की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक तथा सरकारी योजनाओं के लिए उन्हें कानूनी विशेषज्ञ या सूचना के अधिकार कानून अंतर्गत निवेदन करने से ही जानकारी प्राप्त होगी यह सोचकर उन्हें कई बार काफी कठिनाई तथा समय की बर्बादी झेलनी पड़ती है.

लेकिन कई लोगों को भारत सरकारद्वारा नॅशनल पोर्टल ऑफ इंडिया इस भारत सरकार की अधिकृत वेबसाइट के द्वारा केंद्र सरकार तथा देश के तमाम राज्य सरकारों के अलग अलग कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक तथा कई सरकारी योजनाओं को डाउनलोड कराने के लिए एक पोर्टल की सुविधा उपलब्ध की गई है इसके बारे में जानकारी नहीं है. इस पोर्टल के द्वारा आम लोग केंद्र तथा राज्य सरकारों के कई कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक तथा कई सरकारी योजनाओं की जानकारी मुफ्त में देख सकते हैं इसके अलावा उन कानून, अध्यादेश, विधेयक आदि को डाउनलोड भी कर सकते हैं.

नॅशनल पोर्टल ऑफ इंडिया की अधिकृत वेबसाइट की लिंक नीचे दी गई है जिस पर क्लिक करके आम जनता केंद्र सरकार तथा देश के तमाम राज्य सरकारों की अलग अलग कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक तथा कई सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल कर सकती है.
नॅशनल पोर्टल ऑफ इंडिया वेबसाईट लिंक-
https://www.india.gov.in

हालांकि उपरोक्त लिंक के क्लिक करने के बाद कई सारी योजनाओं तथा अन्य जानकारियों के वजह से वेबसाइट से सिर्फ कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक आदि देखना आम जनता के लिए थोड़ा कठिन हो सकता है, इसीलिए जिस लिंक पर केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार के कानून, नियम, अध्यादेश तथा विधेयक डाउनलोड अथवा प्राप्त किए जा सकते हैं उसकी प्रत्यक्ष लिंक नीचे दी जा रही है-
https://www.india.gov.in/my-government/acts
उपरोक्त लिंक के क्लिक करने के बाद निम्नदर्शित पेज दिखाई देगा-

कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक तथा सरकारी योजना डाउनलोड तथा उपलब्ध करानेवाली सरकारी वेबसाईट
कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक तथा सरकारी योजना डाउनलोड तथा उपलब्ध करानेवाली सरकारी वेबसाईट

उपरोक्त पेज खुलने के बाद सर्च बॉक्स पर Jurisdiction में State या Central यह जानकारी डालकर जिस विषय से संबंधित कानून, नियम, अध्यादेश तथा विधेयक की जानकारी चाहिए वह बॉक्स में भरने के बाद आप को
कुछ ही क्षणोंमें बॉक्सके नीचे एक लिंक अपलोड की जाएगी  आप को संबंधित राज्य की वेबसाइट पर लेकर जाएगी जहां से आपको पूरी जानकारी तथा संबंधित राज्य अथवा केंद्र सरकार के अधिकृत पोर्टल से पूरी जानकारी प्राप्त हो जाएगी.

उदाहरण के तौर पर अगर इस बॉक्स में सिर्फ महाराष्ट्र यह राज्य के कानूनों, नियमों तथा अध्यादेशों की जानकारी चाहिए तो बॉक्स में महाराष्ट्र लिखने पर और उसके बाद सर्च बटन पर क्लिक करने पर महाराष्ट्र सरकार की कानून संबंधी पूरी जानकारी देने वाली अधिकृत वेबसाइट की लिंक खुल जाएगी. हालांकि जिन राज्यों में महाराष्ट्र राज्य की तरह खुद की कानून की जानकारी देने वाली स्वतंत्र वेबसाइट सार्वजनिक नहीं की गई है तो उस राज्य के जो भी कानून उपलब्ध होंगे उनकी पूरी लिस्ट दिखाई देगी और वह उस राज्य के जिस विभाग से संबंधित है उस विभाग की लिंक आपको प्राप्त हो जाएगी.

अन्य तरीके-
उपरोक्त तरीके के अलावा कई सारे उच्च न्यायालयों में, जैसे कि मुंबई उच्च न्यायालयने अपने वेबसाइट पर ई-लाइब्रेरी की सुविधा सार्वजनिक की है जिसके जरिए आप ना केवल महाराष्ट्र राज्य के कानून, अध्यादेश, नियम तथा विधेयकों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं बल्कि केंद्रीय कानून, नियम, अध्यादेश, तथा बिल भी डाउनलोड कर सकते हैं.
मुंबई उच्च न्यायालय की ई-लाइब्रेरी सुविधा की लिंक निचे दी गई है-
https://bombayhighcourt.nic.in/libweb/indianlegislation/IndianLegislation.htm
इस लिंक पर क्लिक करने के बाद निम्नदर्शित वेबपेज खुलेगा जिसमें आप केंद्रीय अथवा महाराष्ट्र राज्य के अलग अलग कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक तथा कई सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं-

कानून, नियम, अध्यादेश, विधेयक तथा सरकारी योजना डाउनलोड तथा उपलब्ध करानेवाली सरकारी वेबसाईट
मुंबई उच्च न्यायलय की ई-लाईब्रेरी सुविधा

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स्कूलकी सीबीएसई संबद्धता या मान्यता ऑनलाईन जांचे

स्कूलों की केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्धता या मान्यता अभिभावक सीबीएसई के अधिकृत वेबसाईट के जरिये कुछ क्षणों में प्राप्त कर सकते है.

कई अभिभावकों को उनके बच्चों का स्कुल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध या मान्यताप्राप्त है या नहीं इस बारे में जानकारी नहीं होती. स्कुल प्रशासन सीबीएसई से संबद्धता या मान्यताप्राप्तता दिखाकर अभिभावकों से मोटी फीस वसूल करते हैं और स्कूलों में फीस वृद्धि को सीबीएसई से संबद्धता या मान्यताप्राप्तता को एक बड़ी वजह बताते है. कई स्कुल तो सीबीएसई से संबद्ध या मान्यताप्राप्तता नहीं होने के बावजूद अपने आप को सीबीएसई से मान्यताप्राप्तता दिखाकर फर्जी तरीके से अभिभावकों को लुटने के कई उदाहरण देशभर में सामने आये है.

इतना ही नहीं कई स्कूल तो केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध या मान्यताप्राप्त ना होने के बावजूद खुलेआम अपने स्कूल के फीस के रसीदों में तथा वार्षिक अहवाल, डायरी, स्कूल के विविध बोर्ड आदि पर  खुद को सीबीएसई से संबद्ध तथा मान्यता प्राप्त होने का फर्जी दावा खुलेआम करते हैं, ऐसे में अभिभावकों के लिए यह लेख संगठन की तरफ से सार्वजानिक किया जा रहा है जिसके द्वारा अभिभावक कुछ मिनटों में उनका स्कूल सीबीएसई से संबद्ध है या नहीं इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते.

स्कूलकी सीबीएसई संबद्धता या मान्यता ऑनलाईन जांचे-
सीबीएसई से कोई स्कूल मान्यताप्राप्त अथवा संबद्ध है या नहीं इसके लिए खुद सीबीएसई ने अपने ऑनलाईन पोर्टलद्वारा सुविधा उपलब्ध कर रखी है, जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति देशभर के किसी भी स्कूल की सीबीएसई संबद्धता तथा मान्यताप्राप्तता की जानकारी कुछ क्षणों में प्राप्त कर सकता है.

प्रक्रिया-
स्कूलकी सीबीएसई संबद्धता या मान्यता ऑनलाईन जानने के लिए सीबीएसई की मुख्य वेबसाइट की लिंक नीचे दी गई है सर्वप्रथम उस पर क्लिक करें-
http://cbse.nic.in/newsite/index.html
उपरोक्त लिंक क्लिक करने के बाद में सीबीएसई की होमपेज खोली जाएगी जिसका निम्नदर्शित होम पेज खुलेगा-

स्कूलकी सीबीएसई संबद्धता या मान्यता ऑनलाईन जांचे
स्कूलकी सीबीएसई संबद्धता या मान्यता ऑनलाईन जांचे

उपरोक्त निर्दीष्टित सीबीएसई का होमपेज खुलने के बाद में ‘Schools Directory’ पर क्लिक करना है (लाल रंग से चिन्हित भाग देंखे), जिसके बाद निम्नदर्शित पेज खुलेगा-

स्कूलकी सीबीएसई संबद्धता या मान्यता ऑनलाईन जांचेCbse-Affiliation-1-1
स्कूलकी सीबीएसई संबद्धता या मान्यता ऑनलाईन जांचे

इसके बाद आप स्कूल के नाम के अनुसार, संबद्धता क्रमांक के अनुसार, किसी राज्य अथवा राज्य में अलग-अलग जिलों के अनुसार अथवा उनके राज्य में कितने स्कूलों को सीबीएसई की संबद्धता तथा मान्यता प्राप्त हुई है इसकी पूरी लिस्ट देख सकते है.

जिन अभिभावकों को ऊपर दी हुई प्रक्रिया के द्वारा नहीं जांच करनी, वो नीचे दी गई हुई लिंक के द्वारा प्रत्यक्ष किसी भी स्कूल का विवरण डाल कर आसानीसे किसी भी राज्य, प्रादेशिक विभाग आदि के अनुसार सीबीएसई की संबद्धता तथा मान्यता की जांच कर सकते हैं.
http://cbseaff.nic.in/cbse_aff/schdir_Report/userview.aspx

हाल ही में मुंबई मिरर में छपी हुई एक न्यूज़ के अनुसार, सीबीएसई के दिल्ली कार्यालयद्वारा यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है कि जिन स्कूल का नाम वेबसाइट पर सीबीएसई से संबद्ध अथवा मान्यता प्राप्त नहीं दिखेगा उन स्कूलों को सीबीएसई द्वारा कोई भी संबद्धता अथवा मान्यता नहीं दी गई है ऐसा मान लिया जाना चाहिए. उपरोक्त
संदर्भित मुंबई मिरर की न्यूज की लिंक-
https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/other/parents-confused-after-mahim-school-drops-mention-of-cbse/articleshow/67069226.cms

फर्जीवाड़े के खिलाफ अपराधिक मुकदमा करें-
जिन अभिभावकों को उनका स्कूल खुद को फर्जी तरीके से सीबीएसई संबद्ध तथा मान्यताप्राप्त बता रहा है, उस  स्कूल के खिलाफ अभिभावक धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा आदि गुनाहों के लिए भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत संबंधित पुलिस स्टेशन में केस दर्ज करा सकते हैं और ईसके अलावा ग्राहक न्यायालय में स्कूल के खिलाफ नुकसान भरपाई के लिए याचिका दायर कर सकते हैं.

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संस्थापक अध्यक्ष- भारतीय क्रांतिकारी संगठन

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ट्राई की सुविधा से अनचाहे टेलीमार्केटिंग कॉलर का नंबर ९ दिन में हमेशा के लिए बंद करवायें

ट्राई के कॉल और एसएमएस सुविधा का इस्तेमाल कर के आप घर बैठे ९ दिनों में अनचाहे टेलीमार्केटिंग कॉलर का नंबर हमेशा के लिए बंद करवा सकते है.

कई लोगों को अपना मोबाइल नंबर डीएनडी  (DND- Do Not Disturb) सुविधा में रजिस्ट्रेशन करने के बाद भी उन्हें अनचाहे टेलीमार्केटिंग कॉल की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. बुजुर्ग सदस्य और महिलाओं को विशेष रूप से ज्यादा तकलीफ सहन करनी पड़ती है. ज्यादातर टेलीमार्केटिंग एजेंट आम जनता से बदतमीजी से बात करते हैं और टेलीमार्केटिंग कॉल कर के आम नागरिकों के निजता के अधिकार का हनन करते हैं.

हालाँकि कई लोगो को इस बात की जानकारी नहीं है कि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण या टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के नियम के तहत डीएनडी  (DND- Do Not Disturb) सुविधा में रजिस्ट्रेशन हुए किसी भी नागरिक को टेलीमार्केटिंग के लिए कॉल करना गैरकानूनी घोषित किया गया है और वह दंडनीय अपराध है. इतना ही नहीं आम जनता घर बैठे केवल एक कॉल या एसएमएस द्वाराही ऐसे टेलीमार्केटिंग कॉल करनेवाले व्यक्ति का नंबर, चाहे वो निजी मोबाइल नंबर से किया गया हो या लँडलाइन नंबरसे, मात्र ९ दिन के भीतर हमेशा के लिए बंद करवा सकते है. इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है-

अपना नंबर डीएनडी  (DND- Do Not Disturb) सुविधा में रजिस्टर करवायें-
आप में से कई लोगों को पता ही होगा की सब से पहले आप को ट्राई के डीएनडी  (DND- Do Not Disturb) सुविधा में अपना नंबर रजिस्टर करवाना होगा. वो आप २ तरीकों से कर सकते है-
१) एसएसएस द्वारा,
२) कॉलद्वारा.
१) १९०९ पर एसएमएस द्वारा-
आप को अपने नंबर से ‘START 0’ टाईप कर के १९०९ इस टोल फ्री नंबर पर एसएमएस करने पर तुरंत बाद ही एसएमएस द्वारा पुष्टि प्राप्त होगी और ७ दिन के भीतर आप का नंबर  डीएनडी  (DND- Do Not Disturb) पर रजिस्टर हो जाएगा जिसके बाद किसी भी व्यक्तिद्वारा आप के नंबर पर की गई टेलीमार्केटिंग कॉल गैरकानूनी समझी जाएगी.
२) १९०९ पर कॉलद्वारा-
आप को अपने नंबर से १९०९ इस टोल फ्री नंबर पर कॉल कर के ग्राहक प्रतिनिधि से अनुरोध कर के अपना नंबर डीएनडी  (DND- Do Not Disturb) सुविधा में रजिस्टर करवा सकते है और ७ दिन के भीतर आप का नंबर  डीएनडी  (DND- Do Not Disturb) पर रजिस्टर हो जाएगा जिसके बाद किसी भी व्यक्तिद्वारा आप के नंबर पर की गई कॉल टेलीमार्केटिंग गैरकानूनी समझी जाएगी.

डीएनडी पर रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद टेलीमार्केटिंग कॉल करनेवाले एजेंटों के नंबर ९ दिन में बंद करवायें-
यह आप २ तरीके से कर सकते हैं एक एसएमएस के द्वारा और दूसरा कॉल सेंटर को कॉल करके नीचे दी हुई प्रक्रिया के द्वारा-
१) १९०९ पर कॉल कर के गैरकानूनी टेलिमार्केटिंग एंजंट का नंबर बंद करवाना-
आप अपने मोबाइल तथा लैंडलाइन से १९०९ इस नंबर पर कॉल करके जिस नंबर से आपको अनचाहा टेलीमार्केटिंग कॉल किया गया है वह नंबर बता कर, उसका पूरा विवरण देकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इस बात का ध्यान रहे कि नियम के अनुसार आपकी शिकायत टेलीमार्केटिंग कॉल आने के ३ दिन के अंदर रजिस्टर होनी चाहिए. 3 दिन होने के बाद भी आप शिकायत दर्ज करा सकते हैं लेकिन कोशिश यही कीजिए की टेलीमार्केटिंग कॉल आने के ७२ घंटे के अंदर आप शिकायत दर्ज करवा दे.

२) १९०९ पर एसएमएस भेजकर गैरकानूनी टेलिमार्केटिंग एंजंट का नंबर बंद करवाना-
नीचे दिए हुए ट्राई के फॉर्मेट से आप अपने मोबाइल से मात्र एक एसएमएस कर के घर बैठे 9 दिन के अंदर अनचाहे टेलीमार्केटिंग कॉल करनेवाले का नंबर हमेशा के लिए बंद करवा सकते हैं. इसके लिए नीचे दिया गया ट्राई का फॉर्मेट देखें-
Send Sms to 1909 as –
The unsolicited commercial communication, XXXXXXXXXX,dd/mm/yy” 
to 1909
*यानी उदहारण के तौर पर,
अगर आप को १ जनवरी २०१९ को १२३४५६७८९० इस नंबरसे अनचाहा गैरकानूनी टेलीमार्केटिंग कॉल आया है तो आप को ट्राई के फॉर्मेट के अनुसार-
‘The Unsolicited Commercial Communication, 1234567890, 01.01.2019’
ऐसा एसएमएस १९०९ पर भेजना होगा जिसके ९ दिन के अंदर आप के सर्विस प्रोवाइडर कंपनीको उस नंबर पर कारवाई करनी ही होगी, अगर मोबाईल कंपनी ऐसी कारवाई नहीं करती तो आप की शिकायत पर ट्राई उन पर भारी जुर्माना लगाने के लिए क़ानूनी रूप से बाध्य है.

व्यक्तिगत सफलता-
मुझे खुद वोडाफोन कंपनी से अनचाहा गैरकानूनी टेलीमार्केटिंग कॉल आने के पश्चात मैंने किये हुए शिकायत पर गैरकानूनी अनचाहा टेलीमार्केटिंग कॉल करनेवाले एजंटका नंबर हमेशा के लिए बंद करवा दिया गया है. यह आप निचे दी गई स्नैपशॉटद्वारा देख सकते है-
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इस तरह जब मुझे खुद ३० मार्च २०१८ को वोडाफोन कंपनीद्वारा टेलीमार्केटिंग कॉल की गई और बावजूद इसके की मैंने टेलीमार्केटिंग एजेंट को समझाया कि उसका कॉल गैरकानूनी है, फिर भी उसने बदतमीजी से ‘आपको जो करना है कीजिये, जहा शिकायत करनी है कर लीजिए मुझे फर्क नहीं पड़ता है’ ऐसा जवाब दिया. उसके बाद मैंने ट्राई सुविधा का इस्तेमाल कर के जब १९०९ पर एसएमएसद्वारा शिकायत की, उसका नंबर कुछ दिनों में हमेशा के लिए बंद कर दिया गया.
सोचिये, अगर देशभर के लाखों लोग इस तरीके से अपने अधिकार का इस्तेमाल करें, तो कई बैंक, इंश्योरेंस कंपनीद्वारा की जाने वाली अनचाहे और गैरकानूनी टेलीमार्केटिंग कॉल हमेशा के लिए समाप्त की जा सकती है और ऐसे बड़ी कंपनियों को घर बैठे हमेशा के लिए सबक सिखाया जा सकता है.

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-ॲड.सिद्धार्थशंकर शर्मा
संस्थापक अध्यक्ष- भारतीय क्रांतिकारी संगठन